गुरु चांडाल योग
गुरु चांडाल योग व्यक्ति के शुभ गुणों को घटा देता है और नकारात्मक गुण बढ़ा देता है | इस दोष के निर्माण में बृहस्पति को गुरु कहा गया है तथा राहु को चांडाल माना गया है
गुरु चांडाल योग
ज्योतिष शास्त्र में शुभ और नकारात्मक योग दोनों होते हैं. सबसे बड़े नकारात्मक योगों में से एक “गुरु चांडाल योग” है. अगर कुंडली में राहु बृहस्पति एकसाथ हों तो यह योग बन जाता है. कुंडली में कहीं भी यह योग बनता हो तो हमेशा नुकसान ही करता है. अगर यह लग्न, पंचम या नवम भाव में हो तो विशेष नकारात्मक होता है
गुरु चांडाल योग के प्रभावों
गुरु चांडाल योग से व्यक्ति के जीवन पर कई प्रकार के प्रभाव हो सकते हैं। इस योग के निम्नलिखित प्रभाव हो सकते हैं
- चरित्र कमजोरी: गुरु चांडाल योग के अस्तित्व में, विशेषकर गुरु और राहु का सम्मिलन, व्यक्ति के चरित्र को
कमजोर कर सकता है। - स्वास्थ्य समस्याएं: इस योग का प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है, जिससे पाचन या लिवर संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
- धर्म भ्रष्टता: गुरु-राहु के संयोजन से, व्यक्ति का धार्मिक दृष्टिकोण कमजोर हो सकता है और उसे अधर्मिक कार्यों की दिशा में जाना पड़ सकता है।
- वैवाहिक संबंधों पर असर: अगर किसी महिला की कुंडली में गुरु चांडाल योग है, तो यह उसके वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
गुरु चांडाल योग पूजन
गुरु चांडाल योग के पूजन का अर्थ है गुरु और राहु की योगशास्त्र में योगदान से संबंधित पूजा आयोजित करना। यह पूजा भगवान गुरु और राहु की कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के उद्देश्य से की जाती है। इस पूजा का आयोजन गुरुवार को विशेष रूप से किया जा सकता है, क्योंकि गुरुवार गुरु का दिन होता है। यह पूजा विशेषकर उन व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जिनकी कुंडली में गुरु चांडाल योग हो, और उन्हें इसे निवारण करने की चाह हो। पूजा के दौरान, गुरु मंत्रों का जाप किया जा सकता है, और राहु को शांति के लिए भी आराधना की जा सकती है। इसके लिए विशेष पूजा सामग्री की आवश्यकता हो सकती है, जैसे कि फल, पुष्प, चन्दन, कुमकुम, नील रंग, गुड़, और गंगाजल। पूजन के साथ-साथ, व्रत और दान भी दिया जा सकता है। यह एक आध्यात्मिक आचरण है, और इसे भक्ति और विश्वास के साथ किया जाता है ताकि व्यक्ति गुरु और राहु की शक्तियों से आशीर्वाद प्राप्त कर सके। ध्यानपूर्वक और समर्पित भावना के साथ गुरु चांडाल योग के पूजन से व्यक्ति अपने जीवन को शांति, समृद्धि, और सुख- शांति की दिशा में बदल सकता है।
गुरु चांडाल योग के प्रभावों से बचने के उपाय:
- गुरु चांडाल योग के उपास्य प्रभावों से बचाव के लिए राहु का संबंधित मंत्रों का जाप करना महत्वपूर्ण है। “ॐ राहु रां राहवे नम:” मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं।
- गुरु चांडाल योग के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए, नियमित रूप से केले का पूजन करना भी एक सार्थक कदम है।
- रोजाना हल्दी और चंदन का तिलक लगाना भी शुभ माना जाता है और यह गुरु चांडाल योग के प्रभावों को कम करने में सहायक हो सकता है।
- गुरु चांडाल योग के दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए, पक्षियों को दाना खिलाना एक उपयुक्त कदम है। साथ ही,खूब दान-पुण्य करना भी इस प्रकार के योग के प्रभावों को निष्क्रिय करने में मदद कर सकता है।
